Geeta thakur

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बड़ा दिन

बड़ा दिन
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क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह 25 दिसंबर को पड़ता है। इस दिन संपूर्ण विश्व में अवकाश रहता है।
एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7से 2ई. पू. के बीच हुआ था।
25दिसम्बर यीशु के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है और लगता है इस तिथि को एक रोमन पर्व या (मकर संक्रांति) (शीत अयनांत) से सम्बंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है।

कहा जाता है कि 336ई. पू. रोम में पहले ईसाई सम्राट के दौर में 25दिसंबर के दिन क्रिसमस मनाया गया। जिसके कुछ वर्षों बाद पोप जूलियस ओफिश्यली जीजस क्राईस्ट का जन्म दिन 25दिसम्बर को मनाने का ऐलान किया। तब से पश्चिमी देशों में क्रिसमस को हॉलिडे मनाया जाने लगा।
तभी से पहले क्रिसमस मनाया जाने लगा।



हजारों वर्ष पहले उत्तरी यूरोप में क्रिसमस ट्री की शुरुआत हुई थी।
उस वक्त (फर) नाम के पेड़ को सजाकर ये त्योहार मनाया जाता था।

ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबल के अनुसार प्रभु यीशु का जन्म इसराइल के शहर (बेथलेहेम) में चार ईसा पूर्व हुआ था।

यीशु का ताल्लुक शुरु से ही (यहूदी धर्म) से माना जाता है।
माता का नाम मरियम और पिता का नाम युसूफ था
कहते हैं परमात्मा का संकेत मानकर यूसुफ ने मरियम से विवाह किया और जो संतान हुई उसका नाम यीशु पड़ गया।
ईसा मसीह के जन्म की अलग अलग मान्यता है।

बचपन से ही पिता के साथ काम मे हाथ बटाया, वह बड़ई थे।
३०
वर्ष की आयु तक वे मानवता के कल्याण के लिए कार्य करते रहें। जगह-जगह उपदेश देते थे। सही धर्म की शिक्षा देते थे और ऐसा करना यहूदी धर्म के कट्टरपंथियों को अच्छा नहीं लगा।

जीवन के 30 साल ईसा मसीह ने एक बड़ई के रुप मे बेथलेहम के पास (नाजरथ मे बिताए।
ईसा मसीह में धर्म के प्रचार में उनके दो प्रमुख शिष्य बने।
1*एंद्रयूज
2*पीटर

रोमन गवर्नर को धर्म का प्रचार अच्छा नहीं लगा और उन्हें सूली पर चढ़ा दिया।
कहते हैं सूली पर चढ़ाए जाने के बाद ईश्वर के चमत्कार से यीशु फिर से जीवित हो गए और फिर बाद में उन्होंने ईसाई धर्म की स्थापना करी। गुड फ्राइडे के दिन उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था।

सूली पर चढ़ाने के लिए वहां के गवर्नर रोमन पार्टियस) था।
ईसा मसीह को सूली पर ३३वी ईसवी को चढ़ाया गया था।


दुनियाभर में क्रिसमस का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्रभु यीशु के जन्म की खुशी में ईसाई समुदाय के लोग क्रिसमस का त्योहार मना कर अपनी खुशी जाहिर करते हैं।
यीशु मसीह का जन्म गौशाला में हुआ था, जिस तरह जन्माष्टमी मेघा रोमांटिक श्री कृष्ण की झांकी बनाई जाती है उसी तरह प्रभु यीशु की याद में कुछ लोग घर में गौशाला बनाते हैं और झांकियों में यीशु को भी दिखाते हैं और गडरिया को भी दर्शाया जाता है।

हजारों वर्ष पहले उत्तरी यूरोप में क्रिसमस ट्री की शुरुआत हुई थी । उस समय
(फर) नाम की पेड़ को सजाकर यह त्यौहार मनाते थी। कई लोग चेरी के पेड़ की टहनियों को भी क्रिसमस के दौरान सजाते थे लेकिन जो लोग क्रिसमस ट्री खरीदने में असमर्थ होते थे वह लकड़ियों का पिरामिड बनाकर उसे सजाते थे।
समय के साथ साथ क्रिसमस ट्री का चलन बढ़ता गया, अब हर व्यक्ति क्रिसमस ट्री लाता है और उसे चॉकलेट खिलौने लाइट्स और अनेक तोहफो से सजाता है और उस पर घंटियां भी लगाते हैं। ऐसा मानना है कि घंटियां में नकारात्मकता बुरी शक्तियों को दूर करती है।
इस सजावट की प्रदर्शन में रंग बिरंगी रोशनी और सांता क्लॉस (जिसे क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है। जो अक्सर रात को क्रिसमस पर बच्चों के लिए उपहार लाने के लिए मशहूर है। सांता की आधुनिक स्वरूप के लिए मीडिया मुख्य रूप से उत्तरदाई है।
सभी लोग एक दूसरे को उपहार देते हैं। चर्च में जाते है। और घरों में विभिन्न प्रकार के केक भी बनाए जाते हैं। विभिन्न प्रकार के समारोह भी आयोजित किए जाते हैं।
मोमबत्तियां जलाकर खुशी मनाते हैं। जिस प्रकार हम दिए जलाकर उत्सव मनाते हैं।
सर्दी भी बहुत हो जाती है।
लोग मेवे और उनसे बनी मिठाईयां बनाते और खाते हैं।

यह पर्व भी अधर्म पर धर्म विजय के लिए मनाया जाता है।

आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
Happy Merry Christmas

गीता ठाकुर दिल्ली से 💐
स्वैच्छिक रचना लेख
प्रतियोगिता हेतु

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6 Comments

HARSHADA GOSAVI

06-Jan-2024 09:36 AM

👍👍👍⭐

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Khushbu

27-Dec-2023 02:51 PM

V nice

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Alka jain

26-Dec-2023 01:59 PM

Nice

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